छत्तीसगढ़ में तीसरे मोर्चे की कवायद तेज़, जगदलपुर में विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

✒️सुभाष मेश्राम की खबर….

25 अक्टूबर की रायपुर बैठक की तैयारी; बस्तर के जल-जंगल-जमीन, आदिवासी अधिकार और स्थानीय रोजगार पर संयुक्त संघर्ष का संकल्प

जगदलपुर, बस्तर। छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस से अलग वैकल्पिक राजनीतिक मंच के गठन की पहल तेज हो गई है। रायपुर में 4 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक के बाद बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित जनता दरबार में विभिन्न राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में आगामी 25 अक्टूबर को रायपुर में प्रस्तावित बड़ी बैठक की तैयारी, साझा राजनीतिक एजेंडे और संगठनात्मक समन्वय पर चर्चा की गई।

बैठक में बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), आदिवासी महासभा दंतेवाड़ा, भारत मुक्ति मोर्चा, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे), भीम आर्मी तथा छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रतिनिधि शामिल हुए।

प्रमुख रूप से CPI के सह सचिव फूल सिंह कचलाम, भारत मुक्ति मोर्चा के नेता बलदेव मांडवी, बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के रेमन मरकामी, रामनाथ नेगी, ओम मरकाम एवं अलका नादन, भीम आर्मी के प्रदेश प्रभारी मनोज बंजारे, छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के मोनी कठोतरे एवं रूपेंद्र देवांगन, तथा आदिवासी महासभा दंतेवाड़ा के बादल बेनर्जी उपस्थित रहे। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक नवनीत चाँद तथा रायपुर संभाग अध्यक्ष जितेंद्र बंजारे भी बैठक में शामिल हुए।

बस्तर के मुद्दे बनेंगे साझा राजनीतिक एजेंडे का आधार

बैठक में जल-जंगल-जमीन, पेसा एवं वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, आदिवासी अधिकारों की रक्षा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, किसानों की समस्याएं, खनिज संपदा में स्थानीय भागीदारी, DMF-CSR में पारदर्शिता और जवाबदेह शासन जैसे मुद्दों पर संयुक्त पहल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक संपदा का लाभ स्थानीय जनता तक पहुंचना चाहिए। प्रस्तावित तीसरे मोर्चे की सार्थकता इस बात से तय होगी कि वह क्षेत्रीय अस्मिता, संवैधानिक अधिकारों और जनहित के सवालों को कितनी मजबूती से उठाता है।

नवनीत चाँद एवं जितेंद्र बंजारे का संयुक्त बयान

“छत्तीसगढ़ में वैकल्पिक राजनीतिक मंच का उद्देश्य केवल चुनावी तालमेल नहीं, बल्कि जनता के वास्तविक सवालों को राजनीतिक एजेंडे में प्राथमिकता दिलाना होना चाहिए। बस्तर के जल-जंगल-जमीन, आदिवासी अधिकार, स्थानीय रोजगार, किसान और प्राकृतिक संसाधनों में स्थानीय भागीदारी जैसे मुद्दों पर सभी सहभागी संगठनों को साझा कार्यक्रम बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।

बस्तर की आवाज को प्रदेश की राजनीति में उचित स्थान दिलाना और जनहित के मुद्दों पर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से संयुक्त संघर्ष करना हमारी प्राथमिकता है। आगामी 25 अक्टूबर की रायपुर बैठक में साझा न्यूनतम कार्यक्रम, संगठनात्मक समन्वय और आगे की रणनीति पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।”

बैठक में प्रस्तावित मंच के स्वरूप, साझा घोषणापत्र और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर सभी सहभागी संगठनों की सहमति से निर्णय लेने पर जोर दिया गया।

“बस्तर के अधिकार, छत्तीसगढ़ के हित—जनता की आवाज सड़क से सदन तक!”

— संयुक्त बैठक में शामिल राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि

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