धान संग्रहण केन्द्रो की लापरवाही खुले मे हजारों टन धान, जिम्मेदार अधिकारी पर हो कारवाही -किसान नेता दयाराम कश्यप


✒️सुभाष मेश्राम की खबर

🟥खुले में पड़ा लाखों टन धान, खराब होने से इसकी जिम्मेदार कौन लेगा
जगदलपुर– विगत वर्षों से भाजपा सरकार द्वारा किसानों के हित में धान खरीदी की बात कही जाती रही है,किन्तु वर्तमान खरीदी सत्र 2025-26 में व्यवस्थाओं की कमी सामने आने लगी है।जिला सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि एवं भुगतान संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन भी किया, उनके आंदोलन की अंदेखी कर यथवात कार्य करने के लिए नोटिस किया गया जिसके भय से सभी आंदोलन कर्मी पुनः कार्य का दायित्व को संभाला, लेकिन खरीदी केन्द्रों की मूल समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है,धान खरीदी पूर्ण होने के बावजूद अब तक राईस मिलरों से पर्याप्त अनुबंध नहीं हो पाने के कारण विभिन्न लेम्पस केन्द्रों में लाखों क्विंटल धान जमा पड़ा हुआ है।अधिकांश स्थानों पर धान खुले में रखा गया है, जहां पर्याप्त ढंकाव और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है।बस्तर क्षेत्र में जनवरी से मार्च के बीच मौसम बदलने लगता है जिससे बारिश की संभावना बनी रहती है तथा पिछले कुछ दिनों से हवा-तूफान और रिमझिम वर्षा भी देखी जा रही है, किन्तु धान रखने की उचित व्यवस्था नही है जिससे खुले में रखा धान खराब होने का खतरा बढ़ गया है।खरीदी केन्द्रों में संसाधनों एवं मद की कमी से रख-रखाव में उचित व्यवस्था नही हो पा रहा, यदि लगातार बारिश होती है तो लाखों क्विंटल धान सड़ सकता है, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।धान खरीदी पूर्ण होने के बाद भी समय पर उठाव न होना कई सवाल खड़े कर रहा है और किसानों के साथ-साथ खरीदी केन्द्रों के कर्मचारियों में भी चिंता बढ़ती जा रही है ।
इस संबंध में किसान कांग्रेस नेता दयाराम कश्यप ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि समय पर राईस मिलरों से अनुबंध नहीं किए जाने के कारण धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित हो रही है । उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र धान का उठाव नहीं किया गया तो सरकार की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है और लाखों क्विंटल धान खराब होने की स्थिति बन जाएगी । जिससे खरीदी प्रभारी एवं लेम्पस कर्मचारियों को भी सुख्ती देने से भी सरकार इंकार कर रहा है वही अब समस्या यह बन रही है कि धान खराब होने पर इसकी भरपाई कौन करेगा सरकार या लेम्पस कर्मी उन्होंने शासन से तत्काल व्यवस्था सुधारने और खरीदी केन्द्रों में पड़े धान को सुरक्षित भंडारण कराने की मांग की है, ताकि किसानों की मेहनत और सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सके।

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