गन्दा पानी और भोजन परोसने वाले होटल, रेस्टोरेंट, नास्ता टेला, चाय टपरी की शिकायत करें फ़ूड विभाग करेगा तत्काल कारवाही,पानी बोतल खरीदने को मजबूर है उपभोक्ता,शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना होटल और रेस्टोरेंट की कानूनी जिम्मेदारी हैं

✒️सुभाष मेश्राम की खबर………

जगदलपुर /छत्तीसगढ़

गांव से लेकर शहरों तक हजारों लोग सुबह नाश्ते से लेकर रात के खाने तक के लिए किसी होटल,नास्ता सेंटर, भोजनालय पर ही समय की कमी के कारण खाना खाते हैं पर कई स्थानों पर गंदगी,दूषित भोजन और गन्दा पानी परोसा जाता हैं जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ता हैं और पीलिया, टाइफाइड,डायरीया जैसी बीमारिया होती हैं जिससे लोगो को मज़बूरी में बोतल का पानी खरीद कर पीना पड़ता हैं जो आज एक सामान्य बात बन गयी हैं पर शुद्ध पानी की व्यवस्था हर होटल रेस्टोरेंट भोजनलय की जिम्मेदारी हैं इनके विरुद्ध शिकायत करने की पूरी जानकारी पड़े और जाने नियम

होटल का नाम काल्पनिक हैं यह नाम केवल उदाहरण के लिए हैं

📍 कोई होटल या रेस्टोरेंट ग्राहकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराता, दूषित पानी परोसता है या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पेयजल देता है, तो उसके खिलाफ मुख्य रूप से खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

🟥कार्रवाई के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
धारा 26 – खाद्य व्यवसाय संचालक (होटल/रेस्टोरेंट मालिक) की जिम्मेदारी तय करती है कि वह सुरक्षित भोजन और पेयजल उपलब्ध कराए।

🟥धारा 56 – अस्वच्छ या अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाद्य कारोबार चलाने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
🟥धारा 59 – यदि दूषित भोजन या पानी से किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान होता है, तो जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
लाइसेंस निलंबन / रद्द – FSSAI लाइसेंस या राज्य खाद्य लाइसेंस को निलंबित या निरस्त किया जा सकता है।
🟥यह कार्रवाई मुख्य रूप से निम्न विभागों द्वारा की जाती है:
खाद्य सुरक्षा विभाग / Food Safety Department
Food Safety Officer (FSO)
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA/FSDA)
स्थानीय स्तर पर नगर निगम / नगर पालिका स्वास्थ्य विभाग भी निरीक्षण और कार्रवाई कर सकता है।



⬛छत्तीसगढ़ में उपभोक्ता संरक्षण और खाद्य सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग तथा संबंधित निरीक्षण एजेंसियों के माध्यम से संचालित होती हैं। �

FCS Chhattisgarh
यदि जांच में पानी दूषित पाया जाता है, तो अधिकारी

📍पानी के नमूने जब्त कर सकते हैं,
📍नोटिस जारी कर सकते हैं,
📍जुर्माना लगा सकते हैं,
📍प्रतिष्ठान सील कर सकते हैं,
📍और गंभीर मामलों में आपराधिक मामला दर्ज कर सकते हैं।
📍शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना होटल और रेस्टोरेंट की कानूनी जिम्मेदारी मानी जाती है।

होटल का नाम काल्पनिक हैं यह नाम केवल उदाहरण के लिए हैं

छत्तीसगढ़ में होटल, रेस्टोरेंट के पानी और खाने की स्वच्छता (Food Hygiene) से जुड़ी शिकायत के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) द्वारा 9340597097 तथा 1967 या 1800-233-3663 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर संचालित किए जाते हैं।

आपकी आवश्यकता के अनुसार शिकायतों को दर्ज कराने के लिए संपर्क विवरण नीचे दिया गया है:
1. खाद्य पदार्थों में मिलावट या अस्वच्छता की शिकायत
हेल्पलाइन नंबर: 9340597097 (खाद्य एवं औषधि प्रशासन)

🟥अमानक या बासी खाना, साफ-सफाई की कमी, और बिना लाइसेंस/पंजीयन के चल रहे होटलों/ढाबों की शिकायत के लिए

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
2. सामान्य नागरिक और सफाई समस्या (पानी व स्वच्छता)
हेल्पलाइन नंबर: 1100 (निदान – जन शिकायत निवारण)

🟥होटलों, सार्वजनिक स्थलों या नलों के दूषित पानी और आस-पास की साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं के लिए इस पर शिकायत दर्ज करने के लिए इस्तेमाल करें
पोर्टल: NIDAAN 1100

3. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन हैं
टोल-फ्री नंबर: 1915 या 1800-11-4000

🟥यदि कोई रेस्टोरेंट या होटल खराब सेवा या दूषित भोजन परोसता है और आपके पैसे वापस नहीं करता, तो आप उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर सकते हैं।

होटल और रेस्टोरेंट के खराब खाने (food) और पानी (water) की साफ-सफाई की शिकायत के लिए आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) के टोल फ्री नंबर 1915 या 1800-11-4000 पर कॉल कर सकते हैं

आप इन माध्यमों से भी अपनी शिकायत सीधे दर्ज करा सकते हैं:
WhatsApp नंबर: 8800001915 पर मैसेज भेजकर。
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: National Consumer Helpline पोर्टल पर जाकर शिकायत दर्ज करें。


🟥FSSAI: खाद्य सुरक्षा से जुड़ी किसी भी गंभीर समस्या के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के टोल-फ्री नंबर 1800-11-2100 पर संपर्क करे

🟥शिकायत करते समय रेस्टोरेंट का नाम, बिल की रसीद और अपनी समस्या (जैसे – गंदा पानी या खराब खाना) का पूरा विवरण अवश्य दें।

📍इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पंहुचा कर लोगो को उनके हक़ अधिकारों के प्रति जागरूक करें

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