दुर्ग ➡️छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला में एक महिला प्रधान आरक्षक की गिरफ्तारी ने पुलिस विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मोहन नगर थाने में पदस्थ रही महिला प्रधान आरक्षक मोनिका सोनी उर्फ मोनिका गुप्ता को जब्त किए गए सोने के जेवरात को गबन करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है,मामला जुलाई 2022 का है, जब दुर्ग के सिंधिया नगर निवासी सोनल द्विवेदी के घर से 79 ग्राम सोने के जेवरात और लगभग 32 हजार रुपये नकदी चोरी हो गई थी। पीड़िता की शिकायत पर मोहन नगर थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर करीब 2.5 लाख रुपये मूल्य के जेवरात बरामद किए थे। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन महिला प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता को सौंपी गई थी।बताया जाता है,कि 30 जून 2023 को आरोपी से बरामद किए गए जेवरात को पीड़िता को सौंपने के बजाय मोनिका गुप्ता ने उन्हें अपने पास ही रख लिया। उन्होंने उच्च अधिकारियों को सूचना दी कि जब्त जेवरात आरक्षी केंद्र की अलमारी में सुरक्षित जमा कर दिए गए हैं, लेकिन बाद में जांच में खुलासा हुआ कि जेवरात आरक्षी केंद्र में जमा ही नहीं किए गए थे।
पीड़िता की शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। जांच में पुष्टि हुई कि जब्त सामान सरकारी प्रक्रिया के अनुसार जमा नहीं किया गया। विभाग ने कई बार स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन संतोष जनक जवाब नहीं मिलने पर 4 मार्च 2025 को मोहन नगर थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर के बाद से वह फरार चल रही थीं। अंततः 2 फरवरी 2026 को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।गंभीर आरोपों के चलते तत्कालीन एसएसपी ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राहत की मांग की, लेकिन वहां से भी उन्हें जमानत नहीं मिल सकी।गौरतलब है कि मोनिका गुप्ता के खिलाफ पूर्व में भी छावनी थाने में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आ चुका है। जांच में यह साबित हुआ था कि उन्होंने एक व्यक्ति से उसकी बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर अवैध राशि ली और अपने पद का दुरुपयोग किया।
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले की आगे की जांच जारी है।
चोरी का बरामद सोना पीड़िता को सौंपने के बजाय अपने पास रखा महिला प्रधान आरक्षक ने अब हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
